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जब परिवार साथ में बैठा हो तो बातचीत के विषय भी चुनिंदा और सबके हित के होने चाहिए, रामायण के एक किस्से से समझ सकते हैं ये बात

रामायण का एक छोटा सा प्रसंग है। भगवान राम को वनवास हो गया, वे लक्ष्मण और सीता के साथ चित्रकूट में रहने लगे। उधर, अयोध्या में राजा दशरथ की मौत हो गई, भरत उनके अंतिम संस्कार और क्रियाकर्म के बाद राम को अयोध्या लौटा लाने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं।

भरत जब राम के आश्रम में पहुंचते हैं तो देखते हैं कि वहां कई संत जुटे हैं। तीन बातों पर चर्चा चल रही है ज्ञान, गुण और धर्म। संतों के साथ बैठकर राम इन्हीं विषयों पर गहन चर्चा कर रहे थे। लक्ष्मण और सीता भी गंभीरता से सुन रहे हैं।

थोड़ी देर तो भरत भी देखते ही रह गए। जिस राम को अपने नगर से निकालकर वन में भेज दिया गया हो। जिसके राजतिलक की घोषणा करने के बाद उसे सन्यासी बना दिया गया हो, वो कितने शांत मन से संतों के साथ बैठे हैं। फिर भरत आश्रम में पहुंचे और फिर राम-भरत के मिलन की घटना घटी।
ये दृश्य देखने, पढऩे या सुनने में साधारण लगता है लेकिन इसके पीछे एक बहुत ही गंभीर और उपयोगी संदेश छिपा है। हम परिवार के साथ बैठते हैं तो बातों का विषय क्या होता है। इस दृश्य में देखिए, एक परिवार के सदस्यों में क्या और कैसी बातें होनी चाहिए।


अक्सर परिवारों में ऐसा नहीं होता, घर के सदस्य साथ बैठते हैं तो या तो झगड़े शुरू हो जाते हैं, पैसों पर विवाद होता है या फिर किसी तीसरे की बुराई की जाती है। इससे परिवार में अंशाति और असंतुलन आता है। हम जब भी परिवार के साथ बैठें तो चर्चा के विषय ज्ञान, गुण, धर्म और भक्ति होना चाहिए। इससे आपसी प्रेम तो बढ़ेगा ही, विवाद की स्थिति भी नहीं होगी। परिवार में हमारा बैठना सार्थक होगा।



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Ramayan When the family is sitting together, the topics of conversation should also be selective and of interest to everyone, it can be understood from a story of Ramayana.


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